बचपन की कुछ यादें...............

मछली जल की रानी है,
जीवन उसका पानी है।
हाथ लगाओ डर जा
येगी
बाहर निकालो मर जायेगी।


पोशम्पा
भाई पोशम्पा,
सौ रुपये की घडी चुराई।
अब तो जेल मे जाना पडेगा,
जेल की रोटी खानी पडेगी,
जेल का पानी
पीना पडेगा।
थै थैयाप्पा थुश
मदारी बाबा खुश।


झूठ बोलना पाप है,
नदी किनारे सांप है।
काली माई आयेगी,
तुमको उठा ले जायेगी।


आज सोमवार है,
चूहे को बुखार है।
चूहा गया डाक्टर के पास,
डाक्टर ने लगायी सुई,
चूहा बोला उईईईईई।



















आलू
-कचालू बेटा कहा गये थे,
बन्दर की झोपडी मे सो रहे थे।
बन्दर ने लात मारी रो रहे थे,
मम्मी ने पैसे दिये हंस रहे थे।



तितली उडी, बस मे चढी।
सीट ना मिली,तो रोने लगी।।
driver बोला आजा मेरे पास,

तितली बोली " हट बदमाश "।

चन्दा मामा दूर के,
पूए पकाये भूर के।
आप खाएं थाली मे,
मुन्ने को दे प्याली मे।


दो चुटियों वाली,
जीजा जी की साली,

जीजा गये अंदर,
साली को ले गया बंदर,............................


















~~Shiv Kant Sharma~~

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